Friday, April 11, 2008

अब न आऊँगा..

अब न आऊँगा, न आऊँगा, न आऊँगा।
भूल कर भी तेरी महफिल मे न आऊँगा।
दिल न मानेगा तो कुछ दूर चला जाऊँगा।
तेरी यादों का जोपैका है वो निकल जायेगा।
दिल मेरा चाँद सितारे से बहल जायेगा।
मैंने गुलरंग लबो से तेरे कभी पी ही नहीं थी।
सोच लूंगा मोहब्बत मैंने कभी की ही नहीं थी।
अपने जलते हुए होठो को कहीं रख लूंगा।
किसी चट्टान के सीने पर जबी रख लूंगा।
आरजुएँ जो उठेंगी तो दबा लूंगा उन्हें।
अश्क आएँगे भी तो दामन से छुपा लूंगा उन्हें।
अपनी आहें न अब सुनाऊँगा कभी।
अपने आंसू न अब दिखाऊँगा कभी।
अब न आऊँगा, न आऊँगा, न आऊँगा।
भूल कर भी तेरी महफिल मे न आऊँगा।

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