Tuesday, April 29, 2008

तेरा ये प्यार भी दरिया है उतर जायेगा..

वो तो खुशबू है हवाओं में बिखर जायेगा ,
मसला फूल का है फूल किधर जायेगा ।
हम तो समझे थे कि एक ज़ख्म है भर जायेगा ,
क्या ख़बर थी कि रग-ए-जान में उतर जायेगा ।
वो हवाओं की तरह खाना-बजां फिरता है ,
एक झोखा है जो आयेगा गुज़र जायेगा ।
वो जब आयेगा तो फिर उस की रफाकात के लिए ,
मौसम-ए-गुल मेरे आँगन में ठहर जायेगा ।
आखिरश वो भी कहीं रेत पे बैठी होगी ,
तेरा ये प्यार भी दरिया है उतर जायेगा ।

0 Comments:

Post a Comment

<< Home