इस दीवाने दिल को देखो क्या सेवा अपनाए है..
इस दीवाने दिल को देखो क्या सेवा अपनाए है,
उस पर ही विस्वाश करे है जिससे धोखा खाए है,
सारा कलेजा कट कट कर जब अश्को मै बह जाए है,
तब कोई फरहाद बना है तब मजनू कहलाये है ।
मैं भी फिरू हूँ मारा मारा छोड़ के उसके दामन को,
पेड़ का पत्ता टूट के जैसे आवारा हो जाए है,
मैं जो तड़प के रोऊ हो तो जालिम यूँ फरमाये है,
इतना गहरा जख्म कहाँ है नाहक शोर मचाये है ।

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